कॉलेज के वो दिन
याद है ना,कॉलेज का वो पहला दिन,ना जान कितने अंजन चहरो के बिच मै हम पहली बार बैटने वाले थे।
स्कूल से अभी-अभी निकले
थे। कॉलेज जाने का एक अलग ही जुनून था हमारे अन्दर।जो स्कूल के टॉपर थे उन्होने तो पहले ही सोचे रखा था कि किसी
ना किसी क्लब का हेड हमे बनना ही हैं। क्लास मैं कुछ
अवरेज बच्चे भी थे । जो अपने काम से काम रखते थे।जो कॉलेज से सीधा घर और घर से
कॉलेज,बीच मैं उन्होने किसी से कोई मतलब नही रहता था। फिर आते हैं हमारी क्लास मैं होनहार छ्त्रे, बैक बैंचर इनके
बिना तो हमारी कॉलेज वाली लाइफ की कहानी अधूरी रहती हैं। क्लास मैं सबसे ज्यादा
एक्टिव यही रहते है, पढ़ाई के लिए नही
मस्ती जो करनी होती थी क्लास के हरे बच्चे के साथ। टीचर भी कभी खासे थे न वो, स्कूल मैं टीचर
सिर्फ पढ़ाते थे,लेकिन कॉलेज मै आने पर पता चला कि इसे अनजान
शहर मैं पेर्ंट्स की तराह खयाल रखते थे।
फिर आती है हमारी क्लास
की वो गर्ल्स, फर्स्ट ईयर मैं आये तो थे हमे एक अलग ही मूड मैं थे,बस एक ही अलग ही नजर थी। बाद में पता चला की ये
भाई-बहन,बेस्ट फ्रैंड और हमारी काय पैटर्न भी बने सकती है । 60% तो कभी आय नही 80%तो कभी देखा भी नहीं। इसे लिए 40% से ही काम चला लेते थे।पर वो वक्त वही पर थम
केयू नही गया और हम अचानक से इतने बड़े
केयू हो गये,की हमारे पास
पीछे पलटकर देखने के लिए टाइम ही नही रहा।कॉलेज तो सबके लिए मानो
दूसरा घर जैसा होता था। देर से आना और देर
से जाना पढ़ने तो कोई आता ही नही था पर हा हर रोज हर किसी के पास एक नई कहानी होती थी टीचर्स को
सुनाने के लिए वो टीचर्स के नये
नये नाम रखना और कुछ ने तो एडमिशन ही सिर्फ
टीचर्स को देखकर ही लिया था।
हर नए सेशन मैं सिर्फ यही सोचते थे कि हमारी जिंदगी मैं भी कोई हरियाली आ जाए ,पर ऐसा हुआ नही ,हर बार सोच कर ही रहे जाते थे। एक्जाम के वक्त शर्त लगती थी की किसके काम आएंगे। पर उसके ज्यादा आ गए तो ।ये सोचकर बहुत बड मस्ती थी यू तो दोस्ती हमे बहुत पक्की थी,पर जिससे हट गई ना उसके लिए तो क्लॉज से बाहर तक फिल्डिंग लेगा रखी थी पर किसने सोचा था,उन सारी यादों का ,उन सारे खासे लेमोहा का सफर यू एक पल मैं खत्म हो जाएगा जहा जन के लिए हमे डेट पड़ती थी। 75% कंप्लेसरी।
वो दोस्तो के साथ
पी हुई चाय याद आएगी ,कैंटीन की वो मस्ती याद आएगी।कॉलेज कभी सपना था
फिर अपना हुआ और आज फिर से पराया हो गया
सायद किसी ने सच ही कहा है,कुछ सालो बाद वे पल बहुत याद आयेंगे,जब हमें सब दोस्त अपनी अपनी मंजिल पे पहुंचे जाएंगे, अकेल जब भी होंगे साथ गुजर हुआ लम्हा याद आयेंगे ,और सायद पैस तो जब बहुत होगें,पर खर्च करने के लिए लम्हा कम पडे जाएंगे।।
एक कप चाय याद दोस्ती की दिलाएगी ,और यही सोचते सोचते सायद फिर से आंख नम हो जाएगी।इस लिए दिल खोले कर, इन लम्हों को जिलों यारो केयूकी वे जो जिंदगी है ना अपना इतिहास फिर नही दोहरायगी।।
थैंक्यू।।



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